

कानपुर देहात। अकबरपुर तहसील क्षेत्र के सहजादपुर स्थित पचास शैया वाले आयुष अस्पताल महर्षि चरक जयंती समारोह का आयोजन हुआ। इस मौके पर आयुर्वेद के महत्व पर मंथन करने के साथ ही इसे संतुलित जीवन जीने की व्यापक पद्धति बताया गया। कार्यक्रम में आए आयुष मिशन के सलाहकार ने यहां विकसित की गई आर्युवेदिक पौधों की वाटिका का निरीक्षण कर इसकी खासी सराहना की।
सहजादपुर स्थित आयुष विंग में आयोजित कार्यक्रम में आर्युवेद के महत्व पर मंथन किया गया। कार्यक्रम में आए उप्र आयुष मिशन के सलाहकार डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि महर्षि चरक ने आयुर्वेद को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सिद्धांत आज भी स्वस्थ जीवन और चिकित्सा पद्धति के लिए प्रासंगिक हैं। जबकि डॉ.बबिता केन ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की व्यापक पद्धति है। उन्होने महर्षि चरक के विचारों और सिद्धांतों को आत्मसात कर आयुर्वेद के महत्व के प्रचार प्रसार की जरूरत पर जोर दिया।इसके बाद आयुष मिशन के सलाहकार ने वहां विकसित की गई हर्बल वाटिका का निरीक्षण किया। आयुष अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बृजेश आर्य ने बताया कि अस्पताल परिसर में खाली जगह में आयुर्वेदिक वाटिका तैयार कराकर बंजर भूमि को हराभरा बनाया गया। यहां आने वाले लोगों को परिसर में लगे अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, आंवला एरोवेला, ब्राह्मी, शतावरी, नीम, अकौड़ा, गूगल, इंसुलिन प्लांट, रोजमेरी आदि औषधीय पौधों की उपयोगिता बताने के साथ इच्छुक लोगों को औषधियों को उगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस पर आयुष मिशन के सलाहकार ने उनकी खासी सराहना की।



