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यमुना में घटने लगा पानी प
कानपुर देहात। चंबल नदी के कैचमेंट एरिया में हुई भारी वर्षा के कारण जिले की दक्षिणी सीमा पर स्थित यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी कम होने से बाढ़ का खतरा तो टल गया। लेकिन खेतों में पानी भरने से फसल के हुए भारी नुकसान से जहां किसान आहत हैं। वहीं पानी उतरने के बाद बीमारी क ेप्रकोप कीइ आशंका से लोग सहमें हुए है।
समुना नदी के जल स्तर में इजाफा होने से जिले में मूसानगर के पास यमुना-सेंगुर के संगम स्थल चपरघटा के साथ ही आसपास के गांवों आढ़न पथार आदि में बाढ का खतरा गहरा गया था।बुधवार को यमुना के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। इससे बाढ़ का खतरा तो टल गया, लेकिन लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। आढ़न गांव के घसीटे, राम भरोसे व रामबाबू ने बताया कि नदी के किनारे के साथ ही इसके नालों के आसपास के खेतों में खड़ी उर्द, ज्वार आदि की फसल पानी में उूबने से खासा नुकसान हुआ है। इसी तरह पथार गांव के राजेश कुमार, सत्येंद्र व सुरेश आदि ने कहा कि तिली व सब्जी की फसलों को नुकसान होने के साथ ही अब पानी उतरने के बाद बीमारियों के प्रकोप का खतरा बना हुआ है। जबकि पथार गांव के रास्ते मे बनी पुलिया के पास पानी भरने से हुई कटान से सउ़क को नुकसान भी हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के कालपी स्थित केंद्र के शिफ्ट प्रभारी सौरभ यादव ने बताया कि बुधवार को तीन सेमी की रफ्तार से यमुना में पानी घट रहा है। शाम छह बजे यमुना 103. 32 मीटर पर बह रही थी। आपदा विशेषज्ञ अश्वनी वर्मा ने बताया कि यमुना में पानी कम होने लगा है। डीएम ने एसडीएम भोगनीपुर को फसलों के नुकसान का आंकलन कराने व सीएमओ को पानी उतरने के बाद संभावित बीमारियों के मद्देनजर उपचार का प्रबंध कराने का निर्देश दिया है।

कानपुर देहात। चंबल नदी के कैचमेंट एरिया में हुई भारी वर्षा के कारण जिले की दक्षिणी सीमा पर स्थित यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी कम होने से बाढ़ का खतरा तो टल गया। लेकिन खेतों में पानी भरने से फसल के हुए भारी नुकसान से जहां किसान आहत हैं। वहीं पानी उतरने के बाद बीमारी क ेप्रकोप कीइ आशंका से लोग सहमें हुए है।
समुना नदी के जल स्तर में इजाफा होने से जिले में मूसानगर के पास यमुना-सेंगुर के संगम स्थल चपरघटा के साथ ही आसपास के गांवों आढ़न पथार आदि में बाढ का खतरा गहरा गया था।बुधवार को यमुना के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। इससे बाढ़ का खतरा तो टल गया, लेकिन लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। आढ़न गांव के घसीटे, राम भरोसे व रामबाबू ने बताया कि नदी के किनारे के साथ ही इसके नालों के आसपास के खेतों में खड़ी उर्द, ज्वार आदि की फसल पानी में उूबने से खासा नुकसान हुआ है। इसी तरह पथार गांव के राजेश कुमार, सत्येंद्र व सुरेश आदि ने कहा कि तिली व सब्जी की फसलों को नुकसान होने के साथ ही अब पानी उतरने के बाद बीमारियों के प्रकोप का खतरा बना हुआ है। जबकि पथार गांव के रास्ते मे बनी पुलिया के पास पानी भरने से हुई कटान से सउ़क को नुकसान भी हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के कालपी स्थित केंद्र के शिफ्ट प्रभारी सौरभ यादव ने बताया कि बुधवार को तीन सेमी की रफ्तार से यमुना में पानी घट रहा है। शाम छह बजे यमुना 103. 32 मीटर पर बह रही थी। आपदा विशेषज्ञ अश्वनी वर्मा ने बताया कि यमुना में पानी कम होने लगा है। डीएम ने एसडीएम भोगनीपुर को फसलों के नुकसान का आंकलन कराने व सीएमओ को पानी उतरने के बाद संभावित बीमारियों के मद्देनजर उपचार का प्रबंध कराने का निर्देश दिया है।



