

कानपुर देहात। भोगनीपुर तहसील क्षेत्र के मूसानगर में पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए उपलब्ध कराई गई 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया। इस जमीन के हेरफेर में तत्कालीन एडीएम भू अध्याप्ति , उनके दफ्तर के कर्मियों के अलावा दो कंपनियों व संबंधित बैंकौन के अफसरों के खिलाफ दर्ज मुकदमें मे अब दोषियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कवायद तेज की हैं । मूसानगर में पावर प्रोजेक्ट के लिए साल 2011 में मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को 944 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थीं। इसमें मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के ग्राम कृपालपुर, भुण्डा, चपरघटा, रसूलपुर और भरतौली में 90.3260 हेक्टेयर पट्टा की भूमि तथा 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। जबकि मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगाँव और चपरघटा में 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर 568.651 हे. जमीन दी गई थी। 28 जून 2011 को तब हुई थी जब ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था।अनुबंध के तहत इन कंपनियों को जमीन का कब्जा मिलने के तीन साल के अंदर निर्माण पूरा करना था। लेकिन 15 साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इन कंपनियों ने निर्माण कार्य शुरू तक नहीं कराया । एग्रीमेंट की शर्त में साफ लिखा था कि यह कंपनियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमीन को किसी को बेच नहीं सकतीं, न ही लीज पर दे सकती हैं और न ही गिरवी रख सकती हैं। इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर ने बिना किसी अनुमति के जमीन को आईडीबीआई बैंक में बंधक रख दिया। जबकि मैसर्स लैन्को अनपरा पावर ने भी सरकार को बिना बताए जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रख दिया। जमीन के इस घोटाले का मामला संज्ञान में आने पर डीएम कपिल सिंह ने 12 मई को मुख्यमंत्री से मिलकर उनको पूरे प्रकरण से अवगत कराया । इसके बाद 13 मई को भोगनीपुर की तहसीलदार प्रिया सिंह ने मूसानगर थाने में तत्कालीन एडीएम भू अध्याप्ति ओके सिंह, उनके कार्यालय के कर्मचारी के साथ ही लैंको और हिमावत कम्पनियों के अधिकारियों के साथ ही मिलीभगत करके जमीन बंधक रखकर लोन देने वाली आईडीबीआई बैंक, केनरा बैंक व गुरुग्राम की पीएनबी शाखाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अब जमीन का अनुबंध करने वाले ऊर्जा विभाग की ओर से अनुबंध निरस्त कर दिया गया है। साथ ही जमीन राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके बाद प्रकरण की विवेचना के लिए गठित एसआईटी ने अब रिपोर्ट में आरोपितो की गिरफ्तारी के लिए कवायद तेज की हैं ।
घोटाला संज्ञान में आने पर शासन ने दिखाया कड़ा रुख: अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होने व जमीन घोटाले का मामला संज्ञान में आने पर शासन ने अब सख्त रुख अपनाया हैं। अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस दोनों कंपनियों के रजिस्टर्ड पते और ईमेल पर भेजा गया था, लेकिन कंपनियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया।नोटिस का जवाब नहीं आने पर 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश निर्गत कर दिया। आदेश में राज्यपाल की अनुमति से पूरी 944.029 हेक्टेयर जमीन को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के लिए कहा गया। आदेश की प्रति कानपुर देहात डीएम को भेजकर राजस्व अभिलेखों में इस पूरी जमीन को ऊर्जा विभाग व राज्य सरकार के नाम अंकित कराने की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया ।डीएम कपिल सिंह ने बताया कि शासन स्तर से जो भी निर्देश होंगे उसका अनुपालन कराया जाएगा।




