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कानपुर देहात। डेरापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम बनीपारा जिनई स्थिति पौराणिक महादेव मंदिर के पास स्थित ऐतिहासक खेडा व ‘उषा बुर्ज’ में अवैध खनन कराने के मामले में अंतत: एक लख्ेपाल पर कार्रवाई की गाज गिर गई। नायब तहसीलदार की जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही उजागर होने पर क्षेत्रीय लेखाल को निलंबित कर दिया गया। इसक साथ ही अवैध खनन के मामले में विस्तृत रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है।
बानीपारा जिनई स्थित पौराणिक बाणेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था व आराधाना का केंद्र है। कानपुर के इतिहासकार लक्ष्मीकांत त्रिपाठी के अनुसार इस मंदिर को दैत्यराज बलि के पुत्र बाणासुर ने स्थापित किया था। इसके पास स्थित खेड़ा टीला भूमि उस समय बाणासुर का राजमहल व राजधानी श्रोणितपुर हुआ करती थी। श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का बाणासुर की पुत्री ऊषा ने अपनी दासी चित्रलेखा के सहयोग से अपहरण करा लिया था। इसके बाद हुए श्री कृष्ण व बाणासुर के संग्राम में यह नगर ध्वस्त हो गया था। टीला के पास स्थित सडनपुरवा इसका श्रोणितपुर का अपभ्रंश रूप है। परीक्षित पुत्र जन्मेजय ने इसको फिर से बसाने के बाद इसका नाम बाणपुरा जन्मेजय रखा था। जो अपभ्रंश रूप में बनीपारा जिनई के नाम से जाना जाता है।जिम्मेदारों की अनदेखी व लापरवाही से खनन माफियाओं ने ऐतिहासिक टीला खेड़ा भूमि को खेदकर समतल बना दिया। अवैध खनन की शिकायतों पर सिर्फ जांच के नाम पर खाना पूरी करने से इस ऐतिहासिक टीलाखोडा भूमि का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया। मामले की जांच को गई राजस्व टीम के साथ खनन कर्ताओं की बदसलूकी ने तूल पकडा तो एसडीएम डेरापुर ने नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता से मामले की जांच कराई। इसमें क्षेत्रीय लेखपाल राम आसरे की प्रथम दृष्टया लापरवाही उजागर हुई। इस पर एसडीएम डेरापुर ने लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। नायब तहसीलदार डेरापुर ने बताया कि लेखपाल के निलंबन के साथ ही खान की विस्तृत रिपोर्ट डीएम व खनन विभाग को भेजी गई है। डीएम के निर्देश के बाद मामले में अग्रिम कार्रवाई होगी।




